भारत में आयातित कॉस्मेटिक का लेबल कैसे पढ़ें

किसी आयातित कॉस्मेटिक के पैक के पीछे छोटे अक्षरों में जितना लिखा होता है, वह अक्सर सोच से ज़्यादा होता है। प्रोडक्ट किसने बनाया, कब तक इस्तेमाल करना है और किसने इसे भारत में आयात किया, यह सब लेबल पर लिखा जाता है। इस लेख में हमने बताया है कि भारत के कॉस्मेटिक्स रूल्स, 2020 (Cosmetics Rules, 2020) के मुताबिक़ लेबल पर क्या होना चाहिए, और ख़रीदार इनमें से क्या जाँच सकते हैं।
यह आम जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। नियमों के सटीक शब्द और उनमें हुए बदलाव भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं।
प्रोडक्ट का नाम, निर्माता, तारीख़ें और बैच नंबर

कॉस्मेटिक्स रूल्स का नियम 34 कहता है कि कॉस्मेटिक के अंदर और बाहर, दोनों लेबल पर प्रोडक्ट का नाम, निर्माता का नाम और जहाँ प्रोडक्ट बना उस जगह का पूरा पता होना चाहिए। अगर प्रोडक्ट ऐसी फ़ैक्टरी में बना है जो निर्माता की अपनी नहीं है, तो लेबल पर असली निर्माता का नाम और पता, या "Made in (देश का नाम)" लिखकर वह देश बताया जाना चाहिए जहाँ वह बना। यही नियम यूज़-बिफ़ोर या एक्सपायरी तारीख़ लिखना भी ज़रूरी करता है। कुछ लेबल पर "Use before" या "Expiry" के बाद महीना और साल लिखा होता है, तो कुछ पर बनने की तारीख़ के साथ यह लिखा होता है कि प्रोडक्ट उसके बाद कितने महीने चलेगा।
बैच नंबर भी देखें। नियमों के मुताबिक़ इस नंबर से पहले "B", "Batch No.", "B. No.", "Lot No." या "Lot" लिखा होना चाहिए। इसी नंबर से उस बैच के बनने का रिकॉर्ड खोजा जा सकता है जिससे यह पैक निकला। बाहरी लेबल पर वज़न या आयतन के रूप में नेट कंटेंट भी लिखा होता है। बहुत छोटे पैक को इनमें से कुछ बातों से छूट है, इसलिए मिनी साइज़ पर लेबल छोटा हो सकता है।
सिर्फ़ आयातित कॉस्मेटिक पर मिलने वाली जानकारी

नियम 34 के मुताबिक़ भारत में बिकने वाले आयातित कॉस्मेटिक के यूनिट पैक पर आयात रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट नंबर होना चाहिए, जिसके आगे "RC", "RC No" या "Reg. Cert. No" लिखा हो, और साथ में आयातक का नाम और पता भी। जिस कॉस्मेटिक की पैकिंग और लेबलिंग इन नियमों के मुताबिक़ नहीं हुई है, उसे आयात नहीं किया जा सकता। नियम 18 यह भी कहता है कि कॉस्मेटिक तभी आयात हो सकता है जब उसके लेबल पर लिखी यूज़-बिफ़ोर तारीख़ आयात की तारीख़ से छह महीने से ज़्यादा बाद की हो।
हो सकता है यह जानकारी पैक पर छपी न हो, बल्कि स्टिकर पर हो। अगर किसी आयातित कॉस्मेटिक पर भारत के हिसाब से जानकारी जोड़नी हो, तो नियम बॉन्डेड वेयरहाउस में यूनिट पैक पर स्टिकर लगाने की इजाज़त देते हैं। कॉस्मेटिक आयात पर CDSCO के FAQ में भी यही बताया गया है: रजिस्टर्ड प्रोडक्ट के आयातक, सामान भारत पहुँचने के बाद बॉन्डेड वेयरहाउस में आयातक का नाम और पता और आयात रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट नंबर जैसी भारत के लिए ज़रूरी जानकारी जोड़ सकते हैं। सिर्फ़ स्टिकर लगा होना शक की वजह नहीं है। वहीं नियम 35 कहता है कि केंद्रीय लाइसेंसिंग अथॉरिटी की इजाज़त के बिना कोई भी कंटेनर या लेबल पर निर्माता की लिखी जानकारी को बदल, मिटा या बिगाड़ नहीं सकता।
लेबल जाँचना बस पहला क़दम है
लेबल पर सारी ज़रूरी बातें होने का मतलब यह नहीं कि प्रोडक्ट असली या सुरक्षित है। लेबल बताता है कि प्रोडक्ट की ज़िम्मेदारी किसकी है; यह क्वालिटी का सर्टिफ़िकेट नहीं है। अगर कोई बात लेबल पर नहीं है, तो ख़रीदने से पहले विक्रेता या आयातक से पूछना ठीक रहेगा।
8 सितंबर 2026 के एक पब्लिक नोटिस में CDSCO ने दो क्रीम के नाम बताए, जिन्हें आयात रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट नहीं मिला था, और कहा कि जाँच में उनमें तय सीमा से ज़्यादा भारी धातुएँ (हेवी मेटल) पाई गईं। नोटिस में लोगों को सलाह दी गई है कि वे ऐसे कॉस्मेटिक ख़रीदें और इस्तेमाल करें जिनके लेबल पर मैन्युफ़ैक्चरिंग लाइसेंस नंबर, निर्माता की जानकारी, बैच नंबर, बनने और एक्सपायरी की तारीख़ और आयातित कॉस्मेटिक के मामले में रजिस्ट्रेशन नंबर हो। लेबल में कोई गड़बड़ी दिखे, तो भारत में बने प्रोडक्ट के लिए राज्य के ड्रग्स कंट्रोलर (State Drugs Controller) को और आयातित कॉस्मेटिक के लिए भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल (DCGI) को इसकी शिकायत करने को कहा गया है। रजिस्ट्रेशन नंबर या आयातक की जानकारी के बारे में सवाल हो, तो आप लेबल पर लिखे आयातक से सीधे भी पूछ सकते हैं। कोई भी प्रोडक्ट लगाने पर त्वचा में परेशानी हो, तो उसका इस्तेमाल बंद करें और डॉक्टर या स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह लें।
fragrance-free और unscented एक बात नहीं
ख़ुशबू से जुड़े शब्दों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ डर्मेटोलॉजी (AAD) रूखी त्वचा पर अपनी सलाह में "fragrance-free" लिखे प्रोडक्ट इस्तेमाल करने को कहती है। उसके मुताबिक़ "unscented" लिखे प्रोडक्ट में ऐसे केमिकल हो सकते हैं जो बाकी सामग्री की गंध को दबाते या छिपाते हैं, और ये केमिकल रूखी, संवेदनशील त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं। किसी प्रोडक्ट में गंध न आने का मतलब यह नहीं कि उसमें ख़ुशबू नहीं मिलाई गई।
शक हो तो इंग्रीडिएंट लिस्ट भी देखें। नियम 34 के मुताबिक़ 1% से ज़्यादा मात्रा वाली सामग्री, मिलाते समय के वज़न या आयतन के हिसाब से, घटते क्रम में लिखी जाती है। उसके बाद 1% या उससे कम वाली सामग्री किसी भी क्रम में आती है, और लिस्ट से पहले "INGREDIENTS" शब्द लिखा होता है। 60 ml या उससे कम तरल और 30 g या उससे कम ठोस या अर्ध-ठोस वाले पैक को इससे छूट है। सामग्री का नाम बताता है कि प्रोडक्ट में क्या है; इससे यह पता नहीं चलता कि प्रोडक्ट आपकी त्वचा पर कैसा रहेगा।
HANARI अपने लेबल की तैयारी कैसे कर रहा है
HANARI तीन प्रोडक्ट, Clean Start Gel Cleanser, Even Days Serum और Air-Fit Gel Cream, दिसंबर 2026 में भारत में एक साथ लॉन्च करने की योजना बना रहा है। अभी इनमें से कोई भी बिक्री पर नहीं है। इन्हें भारत लाते समय हम भारत के कॉस्मेटिक लेबलिंग नियमों का पालन करना चाहते हैं। भारत में आयात की नियामक स्थिति, जिसमें CDSCO पंजीकरण शामिल है, अभी तय नहीं है। पूरी INCI सूची और प्रोडक्ट के मूल देश की जानकारी बाद में इसी साइट पर दी जाएगी, और सामग्री से जुड़े सवालों के जवाब FAQ में हैं।